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नवीनतम समसामयिकी – भारत

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नवीनतम समसामयिकी

     

भारत और बहरीन के बीच अवैध मानव तस्करी (विशेषकर महिलाओं और बच्चों के अवैधकरोबार) को रोकने पर सहमति 
पत्र:👉👉
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने भारत और बहरीन के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी। दोनों देशों ने महिलाओं और बच्चों सहित मानव तस्करी के रोकथाम में सहयोग करने पर सहमति जताई। इसमें बचाव, पुनर्वापसी, बरामदगी और इसके शिकार हुए लोगों को परिवारों से मिलाना शामिल है।इस सहमति से दोनों देशों ने दोस्ताना रिश्ते को मजबूत करने का फैसला किया है। दोनों देशों ने मानव की अवैध तस्करी, खासकर महिलाओं और बच्चों की तस्करी को तेजी से रोकने, बचाव करने और प्रत्यर्पण के मुद्दे पर आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।अप्रैल 2016 के पहले सप्ताह में गृहमंत्री के दुबई दौरे के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।भारत और बहरीन राजशाही के बीच सहमति पत्र के महत्वपूर्ण बिंदु निम्निखित हैं:सभी तरह की मानव तस्करी, खासकर महिलाओं और बच्चों की तस्करी रोकने संबंधी सहयोग को मजबूत किया जाएगा और तस्करों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तेजी से जांच सहित दोनों देशों में संगठित अपराध चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।निरोधक उपाय करके महिलाओं और बच्चों की तस्करी का खात्‍मा किया जाएगा और पीडि़त लोगों के अधिकारों की रक्षा होगी।मानव तस्करी को रोकने के लिए दोनों पक्ष तस्करी विरोधी सेल और कार्यबल गठित करेंगे।मानव तस्करों की पहचान के लिए पुलिस और दूसरी संबंधित एजेंसियों के बीच कार्य और सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा।पीडि़त पक्ष की घर वापसी को हरसंभव प्रयास करते हुए तेजी से पूरा किया जाएगा और मूल देश उसके सुरक्षित और प्रभावी पुनर्मिलन के उपाय करेगा।दोनों पक्षों के संयुक्त कार्यबल के प्रतिनिधियों का गठन किया जाएगा जिससे सहमति पत्र पर कामकाज पर निगरानी रखी जा सके।पृष्ठभूमि:मानव तस्करी के मामले में दक्षिण एशिया के देश खासतौर पर प्रभावित हैं। इसमें घरेलू तस्करी या पड़ोसी देशों से तस्करी की घटनाएं होना आम है, हालांकि दक्षिण एशियाई पीडि़तों की पहचान मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ रही है।जहां तक बहरीन की बात है मानव तस्करी का भारत अहम स्रोत है। इतना ही नहीं, पुरुषों और महिलाओं को तस्करी के जरिये बहरीन पहुंचाया जाता है। वहां जबरन मजदूरी और वेश्‍यावृत्ति के लिए इन्‍हें ले जाया जाता है।बहरीन राजशाही और भारत के बीच हर स्तर पर मानव तस्कर रोधी प्रयासों को सख्‍ती से लागू किया गया है जिससे पीडि़तों की सुरक्षा और इस पर प्रतिबंध लग सके। दोनों देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान की भी आवश्यकता है। इसके अलावा, संयुक्त जांच और दूसरी पहल भी जरूरी है।इस उद्देश्‍य के लिए बहरीन राजशाही के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर प्रस्तावित है। भारत ने बांग्‍लादेश के साथ मानव तस्करी को रोकने के लिए पहले ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। 

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साइबर स्पेस तथा साइबर अपराध से मुकाबले केलिए भारत-संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए
समझौते को मंजूरी:👉👉
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में भारत और संयुक्त अमीरात के बीच साइबर स्पेस तथा साइबर अपराध से मुकाबले के लिए पिछले महीने हुए समझौते को मंजूरी दे दी।इस समझौते से दोनों देशों को साइबर अपराध जैसे विषयों को सलझाने में मदद मिलेगी। दोनों देश हर प्रकार से विशेष कर तालमेल, सूचना आदान-प्रदान, साइबर अपराध की जांच में सहयोग के माध्यम से साइबर अपराधों का मुकाबला करेंगे।भारत की ओर से गृह मंत्रालय नोडल एजेंसी होगा जो इस समंझौते को लागू करने के लिए जिम्मेदार होगा। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात की ओर से आपराधिक सुरक्षा के महानिदेशक, आंतरिक सुऱक्षा मंत्रालय तथा राज्य सुरक्षा विभाग सुरक्षा, आतंकवाद, और गैर-पारंपरिक हथियारों के मामले में नोडल एजेंसी होंगे।साइबर स्पेस तथा साइबर अपराध से मुकाबले के लिए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बाच सहयोग में वृद्धि साइबर अपराध के गंभीर खतरों और लोगों की सुरक्षा की दृष्टि से हुई है।

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इसरो के छठे नेवीगेशन सैटेलाइट का श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण:
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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के छठे नेविगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस-1एफ का सफल प्रक्षेपण पीएसएलवी सी32 के द्वारा किया। अंतरिक्षीय कचरे की वजह से यह एक मिनट की देरी से लॉन्च हुआ।ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) सी-32 ने श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आईआरएनएसएस-1एफ को लेकर उड़ान भरी, जिसका उद्देश्य अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के अनुरूप सही नेविगेशन सुविधा देना है।इसरो भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) के तहत पांच उपग्रहों का प्रक्षेपण कर चुका है। आईआरएनएसएस प्रणाली का परिचालन शुरू करने के लिए चार उपग्रह पर्याप्त होंगे, वहीं बाकी तीन इसे और अधिक सटीक और सक्षम बनाएंगे।चार उपग्रहों के प्रक्षेपण के साथ हम 18 घंटे तक नेविगेशन प्रदान करने में सक्षम थे। लेकिन पांचवें प्रक्षेपण के बाद हमारी क्षमता 20 मीटर तक सटीकता के साथ 24 घंटे की हो गई।छठा उपग्रह आईआरएनएसएस-1एफ और सातवां उपग्रह (आईआरएनएस-1जी) इस मामले में और सटीक तथा सक्षम होंगे। इसरो के वैज्ञानिकों ने सभी सात नेविगेशन उपग्रहों को मार्च 2016 तक कक्षा में स्थापित करने की योजना बनाई है। इस लिहाज से सीरीज का अंतिम उपग्रह इस महीने के अंत में भेजा जा सकता है।

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केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री बंडारु दत्तात्रेय नेआम पंजीकरण सुविधा वाले ई-बिज पोर्टल का शुभारंभ किया:👉👉
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केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री बंडारु दत्तात्रेय ने आम पंजीकरण सुविधा वाले ई-बिज पोर्टल का शुभारंभ किया। यह श्रम सुविधा पोर्टल है जो ईपीएफओ/ ईएसआईसी के लिए साझा ईसीआर (इलेक्‍ट्रॉनिक चालान कम रिटर्न)/ ईएसआईसी (कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम) होगा और इसे खान अधिनियम 1952 के वार्षिक वापसी को एकीकृत करने के लिए शुरू किया गया है।श्रम सुविधा पोर्टल भारत की 11 भाषाओं में सूचनाएं मुहैया कराएगा। ये भाषाएं हैं – बंगाली, अंग्रेजी, गुजराती, हिन्‍दी, कन्‍नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू।मंत्रालय में संयुक्त सचिव मनीष गुप्ता ने ई-बिज पोर्टल और श्रम सुविधा पोर्टल को प्रस्तुत किया। मंत्रालय हरियाणा और छह और राज्यों के लिए अगले वित्त वर्ष में पोर्टल सामने लाने का इरादा रखता है। भविष्य की दूसरी पहल के तहत लेन (लोकल इंटर कनेक्ट नेटवर्क) रेजीम भी एक पहल है। बिन (बिजनेस आईडेंटीफिकेशन नंबर) को लेन से जोड़ा गया है। इस तरह श्रम ब्यूरो के रिटर्न और दूसरे रिटर्न जमा करने में समय बचेगा।इस सेवा के शुरू हो जाने से कामकाज की लागत में कमी आएगी और नियोक्ता और दूसरी संस्थाओं के कार्यों में सुविधाजनक होगी और सरलता आएगी। इसके अलावा इस सेवा से कामकाजी माहौल में बेहतरीन और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को गति‍शीलता लाने में मदद मिलेगी।

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उत्तर प्रदेश सरकार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय नेअवैध खनन पर रोक लगाने हेतु निर्देश दिए:👉👉
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9 मार्च 2016 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय (एचसी) ने सोनभद्र जिले के आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन रोकने हेतु उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार को तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी किए।उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंड पीठ ने अवैध खनन के मामले में दायर याचिका पर तत्काल संज्ञान लिया और सोनभद्र जिले में जारी अवैध खनन को रोकने हेतु राज्य सरकार को निर्देश दिया।न्यायालय ने खनन मंत्रालय के प्रमुख सचिव खनन व भूगर्भ, जिला मजिस्ट्रेट और सोनभद्र के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को अविलम्ब कार्रवाई के आदेश दिए। कोर्ट ने डीएम को आदेश दिया है कि वह रिजर्व फारेस्ट एरिया सोनभद्र से अवैध खनन को रोके।उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिए कि अवैध खनन के लिए दोषी अधिकारियों के प्रति भी उचित कार्यवाही की जाए। सोनभद्र के नागेन्द्र सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि अवैध खनन के कारण हुई क्षति की भरपाई के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं जाए।

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प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद (टीआईएफएसी) को नारी शक्ति 
पुरस्कार:👉👉
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भारत के राष्ट्रपति ने प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद (टीआईएफएसी) को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार (नारी शक्ति पुरस्कार 2015) से सम्मानित किया है। टीआईएफएसी को यह सम्मान किरण-आईपीआर योजना के तहत काम करने के लिए प्रदान किया गया है।इसमें बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) प्रशिक्षण के तहत शोध एवं विकास (आरएंडडी) के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाया जाता है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह के दौरान टीआईएफएसी के ईडी प्रोफेसर प्रभात रंजन ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर अपना सामाजिक योगदान देने वाले संस्थानों और लोगों को पुरस्कृत करता है। टीआईएफएसी को किरण-आईपीआर योजना के तहत उसके काम के लिए संस्थान श्रेणी में यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।टीआईएफएसी ने यह कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की किरण यानी नॉलेज इनवॉल्वमेंट इन रिसर्च एडवांसमेंट थ्रू नरचरिंग योजना के एक हिस्से के तौर पर चलाया। पुरस्कार के तौर पर प्रशस्तिपत्र और दो लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।किरण-आईपीआर कार्यक्रम:भारत में महिलाओं की एक बड़ी संख्या है जो विज्ञान की अर्हता रखती हैं। इनमें से अधिकतर महिलाएं घरेलू और सामाजिक कारणों से विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर आगे नहीं बढ़ा पाती हैं। भारत इस तरह की कौशल युक्त और उच्च शिक्षित महिलाओं की प्रतिभा से वंचित रहना बर्दाश्त नहीं कर सकता।यह प्रशिक्षण उन्हें अपने घरों से काम करने का अवसर उपलब्ध कराता है और इसकी मदद से वे पेशेवर और घरेलू मांग के बीच एक अच्छा संतुलन बना पाती है। इस योजना को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से सूचना प्रौद्योगिकी, पूर्वानुमान एवं मूल्यांकन परिषद (टीआईएफएसी) के पेटेंट सुगम केंद्र (पीएफसी) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।लगभग 400 महिलाओं को इस योजना के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें से 138 ने भारत के पेटेंट कार्यालय द्वारा आयोजित पेटेंट एजेंट परीक्षा पास कर ली है। इन महिलाओं में से अधिकांश बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में अपने करियर को आगे बढ़ा रही हैं।वहीं कुछ स्वयं कार्यरत हैं और उद्यमी बन गई हैं और कई अन्य को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। देश में पेटेंट एजेंट के रूप में सक्रिय पेटेंट पेशेवरों में से 10 प्रतिशत किरण-बौद्धिक संपदा अधिकार योजना से हैं।

Updated: March 11, 2016 — 1:15 pm
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