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हिंदी व्याकरण मुहावरें तथा लोकोक्तियाँ

*हिन्दी व्याकरण* 
*मुहावरे और लोकोक्तियाँ*
*मुहावरा*

कोई भी ऐसा वाक्यांश जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ को व्यक्त करे उसे मुहावरा कहते हैं  ।
*लोकोक्ति*
लोक-अनुभव से बनने वाली उक्तियां जो किसी समाज ने लंबे अनुभव से सीखा है उसे एक वाक्य में बाँध दिया है । 
*अक्ल-संबंधी मुहावरे उदाहरण*
अक्ल चकराना- (कुछसमझ में न आना)

पेड़ पर चढ़ते ही मेरी अक्ल चकरा गई ।

अक्ल के पीछे लठ लिएफिरना- (समझाने पर भी नमानना)

वह तुम्हारी बात नहीं मानेगा । अक्ल के पीछे लठ लिए फिरता है वह ।
अक्ल का दुश्मन- (मूर्ख)

वह अक्ल का दुश्मन निकला ।
अक्ल के घोड़े दौड़ाना- (विचार करना)

बड़े-बड़े विद्वानों ने अक्ल के घोड़े दौड़ाए,  तब कहीं जाकर संविधान की रचना हुई ।
*अंग संबंधी मुहावरे उदाहरण*
अंग-अंग ढीला होना- (बहुत थक जाना)

आज तो मेरा अंग-अंग ढीला हो रहा है ।
अंग छूना- (कसम खाना)

मैं अंग छूकर कहता हूँ साहब,  मैंने कलम नहीं देखी ।
अंग-अंग टूटना- (सारे बदनमें दर्द होना)

इस बुखार ने तो मेरा अंग-अंग तोड़कर रख दिया ।
अंग-अंग मुसकाना-(बहुतप्रसन्न होना)

उसका अंग-अंग मुसकरा रहा होगा ।
*आँख-संबंधी मुहावरे उदाहरण*
आँख चुराना- (छिपना)

चोरी पकड़ी जाने के बाद वह मुझसे आँखें चुराता फिरता है ।
आँखों में धूल झोंकना- (धोखा देना)

शिवाजी मुगल पहरेदारों की आँखों में धूल झोंककर कारागार से बाहर निकल गए।
आँख दिखाना- (गुस्से सेदेखना)

जो भारत को आँख दिखाएगा,  हम उसकी आँखें फोड़ देंगे ।
आँखों में गिरना- (सम्मानरहित होना)

कुर्सी की होड़ ने राजनीतिक दलों को जनता की आँखों में गिरा दिया ।
आँख मारना- (इशाराकरना)

वो मेरी बात से सहमत दिखा । क्योंकि उसने मुझे आंख मारी ।
आँख तरसना- (देखने केलालायित होना)

तुम्हें देखने के लिए तो मेरी आँखें तरस गई ।

 

आँख फेर लेना- (प्रतिकूलहोना)

लगता है, गरीबों पर से खुदा ने आँखें फेर ली हैं।

 

आँख बिछाना-(प्रतीक्षाकरना)

महात्मा गांधी जिधर जाते थे उधर ही लोग उनके लिए आँखें बिछाए खड़ी होती थी ।

 

आँखें सेंकना- (सुंदर वस्तुको देखते रहना)

आँख सेंकते रहोगे या कुछ करोगे भी ।
आँखें चार होना- (प्रेमहोना, आमना-सामनाहोना)

कल मुलाकात हुई, उनसे आँखें चार हुईं ।
आँखों का तारा- (बहुतप्यारा)

मेरी बहन मेरी आँखों का तारा है ।

 

आँख उठाना- (देखने कासाहस करना)

अब वह कभी-भी मेरे सामने आँख नहीं उठा सकेगा ।
आँख खुलना- (होश आना)

जब रमेश ने उसकी सारी संपत्ति हड़प ली तब उसकी आँखें खुली ।

 

आँखों में समाना- (दिल मेंबस जाना)

गिरधर मीरा की आँखों में समा गए ।
आँख लगना- (नींद आना)

बड़ी मुश्किल से अब उसकी आँख लगी है ।
आँखों पर पर्दा पड़ना- (लोभ के कारण सच्चाई नदिखना)

अभी तुम्हें कुछ सुझेगा नहीं क्योंकि तुम्हारी आँखों पर परदा पड़ा हुआ है ।
आँखों का कांटा- (अप्रियव्यक्ति)

शराब पीने की आदत की वजह से रोशन अपने पिता की आंखों का कांटा बन गया ।
*कलेजा-संबंधी कुछ मुहावरे उदाहरण*
कलेजे पर हाथ रखना- (अपने दिल से पूछना)

अपने कलेजे पर हाथ रखकर कहो कि क्या तुमने पैन नहीं तोड़ा ।
कलेजा जलना- (काफीदुख होना)

उसकी बातें सुनकर मेरा कलेजा जल उठा ।
कलेजा थामना- (जी कड़ाकरना)

अपने एकमात्र युवा पुत्र की मृत्यु पर माता-पिता कलेजा थामकर रह गए ।

 

कलेजा ठंडा होना- (संतोषहो जाना)

मनचलों की गिरफ्तार होते देख गाँव वालों का कलेजा ठंडा हो गया ।
कलेजे पर पत्थर रखना- (दुख में भी धीरज रखना)

उसने तो कलेजे पर पत्थर रख लिया है।
कलेजे पर साँप लोटना- (ईर्ष्या से जलना)

श्रीराम के राज्याभिषेक का समाचार सुनकर दासी मंथरा के कलेजे पर साँप लोटने लगा ।
*नाक-संबंधी कुछ मुहावरे उदाहरण*
नाक रगड़ना- (दीनतादिखाना)

किसान ने जमीनदार के सामने खूब नाक रगड़ी, पर वो नहीं माना ।

 

नाक पर मक्खी न बैठनेदेना- (अपने पर आँच नआने देना)

कितनी ही मुसीबतें उठाई,  पर उसने नाक पर मक्खी न बैठने दी ।

 

नाक में दम करना- (बहुततंग करना)

चोरों ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है ।

 

नाक कटना- (प्रतिष्ठा नष्टहोना)

नालायक बेटे ने तो उसके खानदान की नाक कटवा दी ।
नाक रखना- (मान रखना)

सच पूछो तो उसने सच कहकर मेरी नाक रख ली ।

 

*कान-संबंधी कुछ मुहावरे उदाहरण*
कान का कच्चा- (सुनते हीकिसी बात पर विश्वासकरना)

जिस मालिक कान के कच्चे होते हैं वे भले कर्मचारियों पर विश्वास नहीं करते ।
कान भरना- (चुगली करना)

 अपने दोस्तों के खिलाफ कभी कान नहीं भरना चाहिए ।
कान कतरना- (बहुत चतुरहोना)

वह तो अभी से बड़े-बड़ों के कान कतरता है ।

 

कान पर जूँ तक न रेंगना- (कुछ असर न होना)

खराब कानून-व्यवस्था पर सरकार की कान पर जूं तक नहीं रेंगती ।

 

कानों कान खबर न होना- (बिलकुल पता न चलना)

यह लो रुपए, लेकिन किसी को कानों कान खबर न हो ।
*मुँह-संबंधी कुछ मुहावरे उदाहरण*
मुँह खून लगना-(रिश्वत लेनेकी आदत पड़ जाना)

उसके मुँह खून लगा है,  बिना पैसे लिए वह काम नहीं करेगा ।

 

मुँह की खाना- (हारमानना)

पड़ोसी के घर के मामले में दखल देकर उसे मुँह की खानी पड़ी।
मुँह में पानी भर आना- (दिल ललचाना)

लड्डू का नाम सुनते ही मेरे मुँह में पानी भर आया ।

 

मुँह छिपाना- (लज्जितहोना)

मुँह छिपाने से काम नहीं बनेगा, कुछ करके भी दिखाओ।
मुँह रखना- (मान रखना)

मैं तुम्हारा मुँह रखने के लिए ही प्रमोद के पास गया था, वरना मुझे क्या जरूरत थी ।

 

मुँहतोड़ जवाब देना- (कड़ाउत्तर देना)

मुँहतोड़ जवाब मिलने पर वह फिर कुछ नहीं बोला ।

 

मुँह पर कालिख पोतना- (कलंक लगाना)

बेटा तुम्हारे कुकर्मों ने मेरे मुँह पर कालिख पोत दी है ।

 

मुँह उतरना- (उदास होना)

आज तुम्हारा मुँह क्यों उतरा हुआ है ।
मुँह ताकना- (दूसरे परआश्रित होना)

अब गेहूँ के लिए हमें विदेशों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा ।
मुँह बंद करना- (चुप करदेना)

रिश्वत ने बड़े-बड़े अफसरों का मुँह बंद कर रखा है ।
*दाँत-संबंधी मुहावरे उदाहरण*
दाँत पीसना- (बहुत ज्यादागुस्सा करना)

मुझ पर दाँत क्यों पीसते हो ? गलती तो उसने की है ।

 

दाँत खट्टे करना- (बुरी तरहहराना)

भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सैनिकों के दाँत खट्टे कर दिए ।
दाँत काटी रोटी- (घनिष्ठता, पक्की मित्रता)

कभी विकास और पंकज में दाँत काटी रोटी थी पर आज एक-दूसरे के जानी दुश्मन हैं ।
*गरदन-संबंधी मुहावरे उदाहरण*
गरदन पर सवार होना- (पीछे पड़ना)

कलर्क की गरदन पर सवार होने से तुम्हारा काम नहीं बनने वाला है ।

 

गरदन पर छुरी फेरना- (अत्याचार करना)

उस बेकसूर की गरदन पर छुरी फेरते तुम्हें शरम नहीं आती । इसकी सजा तुम्हे भगवान देंगे ।
गरदन झुकाना- (लज्जितहोना)

मेरा सामना होते ही उसकी गरदन झुक गई।

 

*गले-संबंधी मुहावरे उदाहरण*
गले मढ़ना- (जबर्दस्तीकिसी को काम सौंपना)

इसे मेरे गले मढ़कर तुमने मुसीबत में डाल दिया है ।
गले का हार- (बहुत प्यारा)

तुम उसके गले का हार हो ।
गला फँसाना- (बंधन मेंपड़ना)

दूसरों के मामले में गला फँसाने से कुछ हाथ नहीं आएगा ।

 

गला घोंटना- (अत्याचारकरना)

जो गरीबों का गला घोंटता है वह देर तक नहीं टिक सकता ।
*सिर-संबंधी मुहावरे  उदाहरण*
सिर पर भूत सवार होना- (धुन लगाना)

तुम्हारे सिर पर तो हर समय भूत सवार रहता है।
सिर पर मौत खेलना- (मृत्युनजदीक होना)

विभीषण ने रावण से कहा कि तुम्हारे सिर पर तो मौत खेल रही है ।
सिर पर खून सवार होना- (मरने-मारने को तैयारहोना)

डैनी के सिर पर तो हर समय खून सवार रहता है ।

 

सिर-धड़ की बाजी लगाना- (प्राणों की भी परवाह नकरना)

भारतीय वीर देश की रक्षा के लिए सिर-धड़ की बाजी लगा देते हैं ।

 

सिर नीचा करना- (लजाजाना)

मुझे देखते ही उसने सिर नीचा कर लिया।
*हाथ-संबंधी मुहावरे  उदाहरण*
 हाथों-हाथ- (बहुत जल्दी)

मेरा काम हाथों-हाथ हो गया ।
हाथ खींचना- (साथ नदेना)

मुसीबत के समय नकली दोस्त हाथ खींच लेते हैं ।
हाथ खाली होना- (रुपया-पैसा न होना)

क्या करूं ? भाई का दाखिला भी जरूरी है, और हाथ भी खाली है ।
हाथ पे हाथ धरकर बैठना- (निकम्मा होना)

उद्यमी कभी भी हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठते हैं ।
हाथ मलते रह जाना-(पछताना)

बिना सोचे-समझे काम करने वाले हाथ मलते हैं ।
हाथों के तोते उड़ना-(दुखसे हैरान होना)

दादा के निधन का समाचार पाते ही उसके हाथों के तोते उड़ गए ।
हाथ साफ करना- (चुरालेना)

ओह ! किसी ने मेरी जेब पर हाथ साफ कर दिया ।

 

हाथ-पाँव मारना- (प्रयासकरना)

हाथ-पाँव मारने वाला व्यक्ति अंत में अवश्य सफलता प्राप्त करता है ।
हाथ डालना-(शुरू करना)-

किसी भी काम में हाथ डालने से पहले उसके अच्छे या बुरे फल पर विचार कर लेना चाहिए ।
*हवा-संबंधी मुहावरे उदाहरण*
हवा लगना- (असर पड़ना)

मोहन को शहर की हवा लग गई ।
हवा से बातें करना-(बहुततेज दौड़ना)

जापान में बुलेट ट्रेन हवा से बातें करती हैं ।
हवाई किले बनान-(झूठीकल्पनाएँ करना)

हवाई किले ही बनाने से सफलता नहीं मिलती ?
हवा हो जाना-(गायब होजाना)-

देखते-ही-देखते मेरी साइकिल न जाने कहाँ हवा हो गई ?
*पानी-संबंधी मुहावरे  उदाहरण*
पानी-पानी होना- (शर्मिंदाहोना)

राकेश पिताजी की पॉकेट से सौ रुपए निकाल ही रहा था कि मैंने देख लिया । मुझे देखते ही वह पानी-पानी हो गया ।
पानी फेर देना- (निराश करदेना)

उसने तो मेरी उम्मीदों पर पानी पेर दिया ।
पानी में आग लगाना- (शांति भंग कर देना )

तुमने तो हमेशा पानी में आग लगाने का ही काम किया है ।
पानी भरना- (तुच्छ लगना)

तुमने तो जीवन-भर पानी ही भरा है ।
*कुछ मिले-जुले मुहावरे*
अँगूठा दिखाना- (देने से साफ इनकार कर देना)
अगर-मगर करना- (टालमटोल करना)
अंगारे बरसाना- (अत्यंत गुस्से से देखना)
आड़े हाथों लेना- (अच्छी तरह काबू करना)
आकाश से बातें करना- (बहुत ऊँचा होना)
ईद का चाँद- (बहुत कम दीखना)
 उँगली पर नचाना- (वश में करना)
कलई खुलना- (रहस्य प्रकट हो जाना)
कुत्ते की मौत करना- (बुरी तरह से मरना
कोल्हू का बैल- (निरंतर काम में लगे रहना)
खाक छानना- (दर-दर भटकना)
गड़े मुरदे उखाड़ना- (पिछली बातों को याद करना)
गुलछर्रे उड़ाना- (मौज करना)
घास खोदना- (फुजूल समय बिताना)
चंपत होना- (भाग जाना)
छक्के छुडा़ना- (बुरी तरह पराजित करना)
टका-सा जवाब देना- (कोरा उत्तर देना)
टोपी उछालना- (अपमानित करना)
तलवे चाटने- (खुशामद करना)
थाली का बैंगन- (अस्थिर विचार वाला)
दौड़-धूप करना- (कठोर श्रम करना)
धज्जियाँ उड़ाना- (नष्ट-भ्रष्ट करना)
नमक-मिर्च लगाना- (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)
नौ-दो ग्यारह होना- (भाग जाना)
दाने-दाने को तरसना- (अत्यंत गरीब होना)
बिल्ली को देखते ही चूहे नौ-

दो ग्यारह हो गए- (गलत काम करके उपदेश देना)
 बाल-बाल बचना- (बड़ी कठिनाई से बचना)
मक्खियाँ मारना- (निकम्मे रहकर समय बिताना)
माथा ठनकना- (संदेह होना)
रफूचक्कर होना- (भाग जाना)
रंग उड़ाना- (घबरा जाना)
लोहे के चने चबाना- (बहुत कठिनाई से सामना करना)
लोहे के चने चबाना- (बहुत कठिनाई से सामना करना)
हजामत बनाना- (ठगना)
राई का पहाड़ बनाना- (छोटी-सी बात को बहुत बढ़ा देना)
*कुछ प्रचलित लोकोक्तियाँ*
अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत- (समय निकल जाने पर पछताने से क्या लाभ)
अधजल गगरी छलकत जाए- (कम गुण वाला व्यक्ति दिखावा बहुत करता है)
आम के आम गुठलियों के दाम- (दुगुना लाभ)
ऊँची दुकान फीका पकवान- (केवल ऊपरी दिखावा करना)
घर का भेदी लंका ढाए- (आपसी फूट के कारण भेद खोलना)
जिसकी लाठी उसकी भैंस- (शक्तिशाली की विजय होती है)
जल में रहकर मगर से वैर- (किसी के आश्रय में रहकर उससे शत्रुता मोल लेना)
दूध का दूध पानी का पानी- (सच और झूठ का ठीक फैसला)
मन चंगा तो कठौती में गंगा- (यदि मन पवित्र है तो घर ही तीर्थ है)
दोनों हाथों में लड्डू- (दोनों ओर लाभ)
मान न मान मैं तेरा मेहमान- (जबरदस्ती किसी का मेहमान बनना)
नाच न जाने आँगन टेढ़ा- (काम करना नहीं आना और बहाने बनाना)
न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी- (कारण के नष्ट होने पर कार्य न होना)
दूर के ढोल सुहावने- (जो चीजें दूर से अच्छी लगती हों)
बगल में छुरी मुँह में राम-राम- (भीतर से शत्रुता और ऊपर से मीठी बातें)
साँप मरे लाठी न टूटे- (हानि भी न हो और काम भी बन जाए)
सावन हरे न भादों सूखे- (हमेशा एक-सी स्थिति में रहना)
सौ सुनार की एक लुहार की- (निर्बल की सैकड़ों चोटों की सबल एक ही चोट से मुकाबला कर देते है)
लातों के भूत बातों से नहीं मानते- (शरारती समझाने से वश में नहीं आते)

Updated: October 21, 2016 — 11:31 pm
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