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दैनिक समसामयिकी 22 मार्च 2017

दैनिक समसामयिकी

22 March 2017(Wednesday)

1.राम जन्मभूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी : बातचीत के माध्यम से निकालें अयोध्या मामले का हल

• अदालत की चौखट पर वर्षो से अटके राम जन्मभूमि विवाद का अदालत के बाहर हल होने की संभावनाएं जगी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे संवेदनशील और आस्था से जुड़ा बताते हुए पक्षकारों से बातचीत कर मसले का हल आम सहमति से निकालने को कहा है। अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट हल निकालने के लिए मध्यस्थता को भी तैयार है।
• यह टिप्पणी मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने भाजपा नेता सुब्रrाण्यम स्वामी की राम जन्मभूमि विवाद मामले की जल्द सुनवाई की मांग पर की।
• स्वामी ने कोर्ट से कहा कि मामला छह वर्षों से लंबित है। इस पर रोजाना सुनवाई कर जल्द निपटारा करना चाहिए। स्वामी ने बताया कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से बात की थी और उन्होंने कहा था कि इस मामले को हल करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है।
• कोर्ट का सुझाव : मुख्य न्यायाधीश खेहर ने स्वामी से कहा, ‘सर्वसम्मति से किसी समाधान पर पहुंचने के लिए आप नए सिरे से प्रयास कर सकते हैं। अगर जरूरत पड़ी तो आपको इस विवाद को खत्म करने के लिए कोई मध्यस्थ भी चुनना चाहिए।
• अगर पक्षकार चाहें कि मैं दोनों पक्षों द्वारा चुने गए मध्यस्थों के साथ बैठूं तो इसके लिए तैयार हूं। यहां तक कि इस उद्देश्य के लिए मेरे साथी जजों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।’ शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष चाहें तो वह मुख्य वार्ताकार भी नियुक्त कर सकती है।
• इसके बाद पीठ ने स्वामी से कहा कि वे सभी पक्षों से सलाह करें और 31 मार्च को अगली तारीख पर फैसले के बारे में सूचित करें।
• क्या है मामला : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में राम जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए अयोध्या में जमीन को तीनों पक्षकारों यानी रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।
• हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी है जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दे रखे हैं।
• संबंधित पक्षकारों को आपसी सहमति से इसका हल निकालना चाहिए। कोर्ट तो आखिरी उपाय होना चाहिए। अदालत तभी बीच में आएगी जब पक्षकार बातचीत से मामला न निपटा पाएं।
• अगर कोई विवाद मध्यस्थता के जरिये सुलझाया जाता है तो जो व्यक्ति दोनों पक्षों को पसंद होता है उसे ही मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया जाता है।
• सुलह के बाद जो समझौता पत्र तैयार होता है उस पर दोनों पक्षों और मध्यस्थ के हस्ताक्षर होते हैं। सुलह पत्र कोर्ट द्वारा मंजूर कर डिक्री का हिस्सा बनाया जाता है।
• अगर मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मध्यस्थता करेंगे तो सुलह होने के बाद तैयार समझौता पत्र पर दोनों पक्षों के तो हस्ताक्षर होंगे लेकिन मध्यस्थ न्यायाधीश के हस्ताक्षर नहीं होंगे।
• पक्षकारों और उनके वकीलों के हस्ताक्षर वाला सुलह पत्र कोर्ट के समक्ष पेश होगा और कोर्ट उसे मंजूर करेगा।
• अयोध्या मामले में जो भी संभावित सुलहनामा होगा उसमें हाई कोर्ट के फैसले को मोडिफाई किया जाएगा।

2. भारत 101 अरबपतियों का ठिकाना, मुकेश अंबानी टॉप पर

• अरबपतियों की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। भारत में ऐसे 101 दौलतमंद हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी शीर्ष पर हैं। फोर्ब्स मैगजीन की ताजा सूची में यह बात कही गई है।
• ‘दुनिया के अरबपतियों’ की फोर्ब्स की सूची में 2,043 सबसे अमीर लोगों को जगह दी गई है। ये ऐसे धनकुबेर हैं, जिनमें से प्रत्येक की संपत्ति एक अरब डॉलर (करीब 65.3 अरब रुपये) से अधिक है। इनकी कुल संपत्ति 7,670 अरब डॉलर है।
• एक साल पहले की तुलना में इन बिलियनेयर की दौलत में 18 फीसद की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। सूची में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स लगातार चौथे साल टॉप पर हैं। पिछले 23 वर्षो के दौरान 18 साल वह दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति रहे हैं।
• गेट्स की संपत्ति 86 अरब डॉलर है। बीते साल उनकी संपत्ति 75 अरब डॉलर थी। उनके बाद बर्कशायर हैथवे के प्रमुख वॉरेन बफे का नंबर है। उनकी संपत्ति 75.6 अरब डॉलर है।
• अमेजन के जेफ बेजोस की संपत्ति में 27.6 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। वह 72.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ तीसरे पायदान पर हैं। उन्होंने पहली बार दुनिया के शीर्ष तीन में जगह बनाई है। इससे पहले वह पांचवें नंबर पर थे।
• अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिग्गज अमीरों की सूची में 3.5 अरब डॉलर की दौलत के साथ 544वें स्थान पर हैं।
• मैगजीन के अनुसार, पहली बार भारत में अरबपतियों की संख्या ने 100 का आंकड़ा पार किया है। भारत में 101 अरबपति हैं। अमेरिका में सबसे अधिक 565 अरबपति हैं। एक साल पहले अमेरिका में 540 बिलियनेयर थे। चीन में इनकी संख्या 319 और जर्मनी में 114 है।
• भारत के अरबपतियों में 59 वर्षीय मुकेश अंबानी सबसे ऊपर हैं। दुनिया के अरबपतियों की सूची में 23.2 अरब डॉलर (करीब 1515 अरब रुपये) की संपत्ति के साथ उन्हें 33वां स्थान मिला है। पत्रिका ने कहा कि तेल एवं गैस क्षेत्र के इस उद्योगपति ने भारत के टेलीकॉम मार्केट में कड़ी प्रतिस्पर्धा छेड़ दी है।
• उनकी दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने पिछले साल सितंबर में 4जी सेवाओं की शुरुआत की है। मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल सूची में 745वें स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति 2.7 अरब डॉलर आंकी गई है।
• भारतीय अरबपतियों की लिस्ट में आर्सेलर मित्तल के चेयरमैन लक्ष्मी निवास मित्तल दूसरे नंबर पर हैं। 16.4 अरब डॉलर के साथ उन्हें दुनिया के अमीरों में 56वां स्थान मिला है। स्टील के मूल्य और मांग में हाल के दिनों में कुछ सुधार आने का मित्तल को फायदा मिला।
• दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मूल के करीब 20 लोग हैं जिन्हें इस सूची में जगह मिली है। ब्रिटेन में बसे भारतीय मूल के हिंदुजा बंधु इनमें सबसे ऊपर हैं। अरबपतियों की सूची में इनका 64वां स्थान है। इनकी संपत्ति 15.4 अरब डॉलर है। भारत में जन्मे पलोनजी मिस्त्री सूची में 77वें स्थान पर हैं।

3. भारत की मदद से मॉरीशस बनेगा पेट्रोल हब

• भारत अपने पुराने मित्र राष्ट्र मॉरीशस को उसके इलाके में एक प्रमुख पेट्रोलियम हब बनाने में मदद करेगा। मंगलवार को भारत-मॉरीशस समिति (हाइड्रोग्राफी) की बैठक में इस बारे में विस्तार से चर्चा हुई। इस बैठक की अगुआई पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान और मॉरीशस के उप प्रधानमंत्री शोकुत्तली शोधुन ने की।
• पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने मॉरीशस के दल को पूरा आश्वासन दिया कि भारत उसे पेट्रोलियम उत्पादों की कमी नहीं होने देगा। साथ ही उसे हरसंभव मदद देगा ताकि यह द्वीप एक पेट्रोलियम हब के तौर पर विकसित हो सके।
• दोनों देशों के बीच यह तय हुआ है कि द्विपक्षीय रिश्तों में हाइड्रोकार्बन की सबसे अहम भूमिका होगी। मॉरीशस के पास हाइड्रोकार्बन का अछा खासा भंडार होने की संभावना है। हालांकि इसके दोहन की अभी तक कोई खास कोशिश नहीं की गई है।
• मॉरीशस में तेल व गैस का पूरा ढांचा भी तैयार किया जा रहा है। इसको लेकर भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई है।

4. भारत से प्रचंड की करीबी चीन को नहीं आ रही रास

• चीन को भारत और नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की करीबी रास नहीं आ रही है। उसने कहा कि प्रचंड की भारत समर्थक नीतियों के कारण चीन और नेपाल के संबंध निचले स्तर पर आ गए हैं। उसने भारत पर श्रीलंका और भूटान के साथ संबंध कमजोर करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
• चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में सामने आई है जब प्रचंड इसी हफ्ते चीन के दौरे पर जाने वाले हैं। अखबार ने कहा है कि कुछ समय पहले तक प्रचंड और उनकी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल का चीन को लेकर दोस्ताना रुख था। लेकिन, पिछले साल अगस्त में दूसरी बार प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद वे दो बार भारत की यात्र कर चुके हैं। बीते नवंबर में उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का काठमांडू में गर्मजोशी से स्वागत किया था।
• अखबार के मुताबिक, प्रचंड की भारत समर्थक विदेश नीति के कारण चीन-नेपाल के संबंध निचले स्तर पर चले गए हैं। नेपाल में चीन की परियोजनाओं में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। गौरतलब है कि प्रचंड 23 मार्च से चीन का पांच दिन का दौरा शुरू करेंगे।
• उनके चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की भी संभावना है।लेख में प्रचंड पर भारत और नेपाली कांग्रेस के प्रभाव में आकर पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिराने का भी आरोप लगाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार ओली का प्रधानमंत्री पद से हटना चीन के लिए गहरी निराशा की बात थी।
• इससे तिब्बत के रास्ते नेपाल को अपने रेल एवं सड़क मार्ग से जोड़ने और हिमालयी देश में प्रभाव का विस्तार करने की योजना को लेकर झटका लगा था।
• उल्लेखनीय है कि नेपाल अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर करता है। भारत उसका स्वाभाविक और परंपरागत मित्र है। लेकिन, ओली के कार्यकाल में इस संबंध को नुकसान पहुंचा था। ग्लोबल टाइम्स ने साथ ही कहा है कि श्रीलंका और भूटान के साथ भी चीन की नजदीकी को भारत कमजोर करने में जुटा है।
• चीन ने नई दिल्ली को हितों पर आंच पहुंचाने की स्थिति में जवाब देने की धमकी दी है। भारतीय मीडिया में चीन के रक्षा मंत्री चांग वानकुआंग की श्रीलंका और नेपाल यात्र की आलोचना की गई है। अखबार ने लिखा है, ‘यह भारत ही है जो दक्षिण एशिया और हिंद महासागर को अपनी जागीर मानता है। क्षेत्र में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव पर उसकी बेचैनी स्वाभाविक है।’
• चीन के सरकारी अखबार ने कहा है, ‘नई दिल्ली के कारण चीन और भूटान के बीच कूटनीतिक रिश्ता स्थापित नहीं हो सका है। चीन के खिलाफ भारत की सतर्क निगाह से श्रीलंका और नेपाल के साथ रिश्ता भी प्रभावित होता है। नई दिल्ली उनकी निष्पक्षता को प्रो-बीजिंग नीति मानता है। यदि यही रुख जारी रहा तो चीन को उसका जवाब देना होगा। क्योंकि भारत के इस रुख से चीन का हित प्रभावित होता है।’

5. रेशम मार्ग पहल को आगे बढ़ाएगा चीन

• सुरक्षा परिषद में समर्थन मिलने के बाद चीन ने कहा कि वह अपनी महत्वाकांक्षी रेशम मार्ग पहल को नियंतण्र स्तर पर आगे बढ़ाएगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारत के संप्रभुता संबंधी चिंता को दरकिनार करते हुए एक प्रस्ताव में सदस्य देशों से परियोजनाओं के कार्यान्वयन का आह्वान किया।
• चीन की आधिकारिक टिप्पणी के साथ ही यहां सरकारी मीडिया ने भारत से पहल को लेकर एक ‘‘अधिक व्यवहारिक’ रुख अपनाने को कहा और दावा किया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा प्रस्तावित परियोजना को नियंतण्र समर्थन मिला हुआ है।
• पहल का उद्देश्य रेल, सड़क और बंदरगाह परियोजनाओं को जोड़ते हुए चीन को यूरो-एशिया से जोड़ना है।विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने सोमवार को कहा, गत 17 मार्च को 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर किए गए प्रस्ताव 2344 में परियोजना को लेकर वैश्विक सहमति दर्शाते हुए मानव जाति के साझा भविष्य के एक समुदाय का निर्माण करने की अवधारणा को पहली बार शामिल किया गया।
• हुआ ने कहा, प्रस्ताव में सभी पक्षों से क्षेत्र एवं मार्ग पहल को आगे बढ़ाने की अपील की गई और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की विशिष्ट जरूरतों को उठाया गया।
• प्रस्ताव में तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन और अफगानिस्तान, भारत, ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना तथा चीन की रेशम मार्ग एवं समुद्री रेशम मार्ग पहलों के जरिए अफगानिस्तान और उसके पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया गया है।

6. बीमा ब्रोकिंग में 100 % एफडीआई पर विचार कर रही सरकार

• सरकार बीमा ब्रोकिंग में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने पर विचार कर रही है। इसका मकसद इस क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी लाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना है। इस समय बीमा क्षेत्र में 49 फीसदी एफडीआई की अनुमति है, जिसमें बीमा ब्रोकिंग, बीमा कंपनियां, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, सर्वेयर लॉस एसेसर यानी नुकसान का आकलन करने वाले शामिल हैं।
• एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार को मिले रिप्रेजेंटेंशन में मांग की गई है कि बीमा ब्रोकरों को वित्तीय सेवाएं देने वाली इंटरमीडियरीज की तरह माना जाना चाहिए जहां 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है। उन्होंने कहा, ‘बीमा ब्रोकिंग भी किसी अन्य वित्तीय या कमोडिटी ब्रोकिंग सेवाओं की तरह है। हाल में हुई एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
• सरकार इस पर सकारात्मकता से विचार कर रही है।’ लेकिन उन्होंने साफ किया कि बीमा कंपनियों के लिए अधिकतम एफडीआई सीमा 49 फीसदी पर कायम रहेगी। उद्योग के जानकारों का कहना है कि बीमा सेक्टर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कमजोर होने के कारण प्रभावित हो रहा है।
• समग्रता में देखें तो सेक्टर की मदद के लिए डिस्ट्रीब्यूशन को मजबूत किए जाने की जरूरत है।

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