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​जापान ने बेहतर जीपीएस सिस्टम के लिए सैटेलाइट लॉन्च किया:

जापान ने 19 अगस्त 2017 को स्वदेशी जियोलोकेशन प्रणाली बनाने के उद्देश्य से तीसरे उपग्रह का प्रक्षेपण किया। इस प्रक्षेपण का उद्देश्य कार नेविगेशन प्रणालियों और स्मार्टफोन नक्शे की सटीकता को सेंटीमीटर के स्तर तक पहुँचाना है।
जापान एरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) के अनुसार, राकेट एच- II ए को दक्षिण जापान के कागोशिमा प्रांत के तानेगाशिमा द्वीप अंतरिक्ष केंद्र से 2:30 अपराह्न (0530 जीएमटी) दागा गया। इस रॉकेट ने सफलतापूर्वक लॉन्च होने के 30 मिनट के बाद “माचिबिकी” नंबर 3 उपग्रह को प्रक्षेपित किया। इस लॉन्च को  पिछले हफ्ते निर्धारित किया गया था लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण स्थगित कर दिया गया था।
जापान अभी तक अमेरिका संचालित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) पर निर्भर रहता है। आज का यह प्रक्षेपण जापान की देश और व्यापक क्षेत्र पर केंद्रित चार उपग्रहों के एक घरेलू संस्करण बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
प्रणाली का पहला उपग्रह माचिबिकी सितंबर 2010 में लॉन्च किया गया था, जबकि दूसरा एक जून 2017 को। एजेंसी की योजना चौथे उपग्रह को मार्च 2018 से पहले लॉन्च करने की है। माचिबिकी का अर्थ मार्गदर्शन होता है। यह एशिया-ओशिनिया क्षेत्र को कवर करेगा और नागरिक उपयोग के लिए यह बनाया गया है।
लाभ:
एक बार जब प्रणाली पूरी तरह तैयार हो जाएगी, स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं तथा ऑटोमोटिव नौवहन प्रणालियों को नक्शे से संबंधित सटीक सूचनाएं मिलेंगी। इस बीच, जापानी अधिकारी साल 2023 तक कक्षा में इस तरह के उपग्रहों की संख्या बढ़ा सकते हैं, जो प्राकृतिक आपदा के हालात में जब संचार की पारंपरिक प्रणालियां नाकाम हो जाएंगी, तब भी यह संचार सुनिश्चि करेगा।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस):
वैश्विक स्थान-निर्धारण प्रणाली (ग्लोबल पोज़ीशनिंग सिस्टम), एक वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली है जिसका विकास संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग ने किया है। 27 अप्रैल, 1995 से इस प्रणाली ने पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया था। वर्तमान समय में जी.पी.एस का प्रयोग बड़े पैमाने पर होने लगा है।
इस प्रणाली के प्रमुख प्रयोग नक्शा बनाने, जमीन का सर्वेक्षण करने, वाणिज्यिक कार्य, वैज्ञानिक प्रयोग, सर्विलैंस और ट्रेकिंग करने तथा जियोकैचिंग के लिये भी होते हैं। पहले पहल उपग्रह नौवहन प्रणाली ट्रांजिट का प्रयोग अमेरिकी नौसेना ने 1960 में किया था। आरंभिक चरण में जीपीएस प्रणाली का प्रयोग सेना के लिए किया जाता था, लेकिन बाद में इसका प्रयोग नागरिक कार्यो में भी होने लगा।

Updated: August 22, 2017 — 12:29 am
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